| 000 | 01566nam a2200109Ia 4500 | ||
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| 082 | _a891.431 | ||
| 100 | _aप्रेमचंद, मुंशी (Prem Chand , Munsi) | ||
| 245 | 0 |
_aगोदान _b(Godan) |
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| 260 |
_bसाहित्यागार _aजयपुर _c२००२ |
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| 500 | _aमुंशी प्रेमचंद ने जो कुछ भी लिखा है, वह आम आदमी की व्यथा कथा है, चाहे वह ग्रामीण हो या शहरी। गांवों की अव्यवस्था, किसान की तड़प, ग्रामीण समाज की विसंगतियां, अंधविश्वास, उत्पीड़न और पीड़ा की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है - गोदान। मुंशी प्रेमचंद की चिर-परिचित शैली का जीता-जागता उदाहरण है गोदान, जो जमीन से जुड़ी हकीकतों को बेनकाब करता है। विश्व की सर्वाधिक भाषाओं में अनुवाद होकर बिकने का गौरव केवल गोदान को ही प्राप्त है। ‘गोदान’ का सर्वाधिक प्रमाणिक संस्करण एक संपूर्ण उपन्यास। | ||
| 942 |
_2ddc _cREF |
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| 999 |
_c2259 _d2259 |
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