गीतांजलि: नागरी में मूल बांग्ला तथा हिन्दी पद्यानुवाद (Gitanjali)
Material type:
TextPublication details: वाग्देवी प्रकाशन बीकानेर २००२ ISBN: - 8187482303
- 891.431
| Item type | Current library | Collection | Call number | Status | Date due | Barcode |
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Raj Kumar Goel Institute of Technology | हिन्दी भाषा संग्रह | 891.431 (Browse shelf(Opens below)) | Not for loan | 14072 | |
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Raj Kumar Goel Institute of Technology | हिन्दी भाषा संग्रह | 891.431 (Browse shelf(Opens below)) | Not for loan | 14073 |
‘गीतांजलि’ गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर (1861-1941) की सर्वाधिक प्रशंसित और पठित पुस्तक है ! इसी पर उन्हें 1913 में विश्वप्रसिद्द नोबेल पुरस्कार भी मिला ! इसके बाद अपने पुरे जीवनकाल में वे भारतीय साहित्याकाश पर छाए रहे ! साहित्य की विभिन्न विधाओं, संगीत और चित्रकला में सतत सृजनरत रहते हुए उन्होंने अंतिम साँस तक सरस्वती की साधना की और भारतवासियों के लिए ‘गुरुदेव’ के रूप में प्रतिष्ठित हुए ! प्रकृति, प्रेम, इश्वर के प्रति निष्ठा, आस्था और मानवतावादी मूल्यों के प्रति समर्पण भाव से संपन्न ‘गीतांजलि’ के गीत पिछली एक सदी से बांग्लाभाषी जनों की आत्मा में बसे हुए हैं ! विभिन्न भाषाओँ में हुए इसके अनुवादों के माध्यम से विश्व-भर के सहृदय पाठक इसका रसास्वादन कर चुके हैं ! प्रतुत अनुवाद हिंदी में अब तक उपलब्ध अन्य अनुवादों से इस अर्थ में भिन्न है कि इसमें मूल बांग्ला रचनाओं की गीतात्मकता को बरक़रार रखा गया है, जो इन गीतों का अभिन्न हिस्सा है ! इस गेयता के कारण आप इन गीतों को याद रख सकते हैं, गा सकते हैं !.

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