चरैवेति ! चरैवेति !! (Record no. 6019)

MARC details
000 -LEADER
fixed length control field 07906nam a2200133Ia 4500
020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
International Standard Book Number 9789351869986
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number 821.2
100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name नाईक, राम (Naik, Ram)
245 #0 - TITLE STATEMENT
Title चरैवेति ! चरैवेति !!
Remainder of title (Charaiveti ! Charaiveti !!)
Statement of responsibility, etc Autobiography
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT)
Name of publisher, distributor, etc प्रभात प्रकाशन
Place of publication, distribution, etc दिल्ली
Date of publication, distribution, etc २०१६
500 ## - GENERAL NOTE
General note बचपन में आटपाडी गाँव में तीन मन बदले, कॉलेज के दिनों में पुणे में गदीमा की पंचवटी में डेरा डालने से पहले छह स्थान बदले, मुंबई में सात और दिल्ली में तीन अलग-अलग जगह पर मैं रह चुका हूँ। आजकल लखनऊ के राजभवन में रह रहा हूँ। हर आशियाने ने मुझे कुछ नया सिखाया, नए लोगों से जोड़ा, मुझे ढाला। अस्सी साल के जीवन में मुझे बीस बार अपना आशियाना बदलना पड़ा, पर अस्थिरता के इस दौर में मेरे कदम कभी डगमगाए नहीं मैं आगे बढ़ता रहा। (पृष्ठ 29) कई बार जिंदगी में अनायास ही ऐसा मोड़ आ जाता है कि वह जिंदगी की दिशा ही बदल देता है। मेरे जीवन में ऐसे बहुत से मोड़ आए। हर मोड़ पर एक नई चुनौती मुँहबाए खड़ी थी। उनका सामना करते-करते मैं आगे बढ़ता रहा। (पृष्ठ 31) कैंसर को मात करने के बाद मेरी दीर्घायु की कामना करते हुए अटलजी ने कहा, ‘‘सोचो, आप मृत्यु के द्वार से क्यों वापस आए हो? आपने वैभवशाली, संपन्न भारत का सपना देखा है। वह महान् कार्य करने के लिए ही मानो आपने पुनर्जन्म लिया है।’’ मैंने भी उनसे वादा किया कि ‘पुनश्च हरि ओम’ कर रहा हूँ। विधाता ने जो आयु मुझे बोनस के रूप में दी है, वह मैं जनसेवा के लिए व्यतीत करूँगा। (पृष्ठ 179) क्या हार में, क्या जीत में किंचित् नहीं भयभीत मैं, कर्तव्य-पथ पर जो भी मिला यह भी सही वो भी सही। आदरणीय अटलजी की यह कविता मेरी प्रिय है। मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह कविता मुझे वास्तव में जीवन में जीनी पड़ेगी। पराजय की कल्पना मैंने कभी नहीं की थी। एक बार नहीं, दो बार मुझे पराजय का सामना करना पड़ा। चुनाव को मैंने हमेशा जनसेवा के सशक्त माध्यम के रूप में ही देखा। अतः अनपेक्षित हार को मैं ‘क्या हार में, क्या जीत में’ की भावना से पचा ले गया। (पृष्ठ 239) साथ ही आत्मचिंतन भी चल रहा था। सेहत से मैं हट्टा-कट्टा हूँ, मन में आया कि पराजय का बदला लेने के लिए क्या मुझे पुनः चुनाव लड़ना चाहिए? चुनाव लड़ना कभी भी मेरा ध्येय नहीं रहा। जीवन भर संगठन एवं जनसेवा के पथ पर चलने के लिए मैं प्रतिबद्ध था, उस पथ पर चुनाव एक पड़ाव था। (पृष्ठ 246) राजभवन में ऐश-ओ-आराम की भरपूर व्यवस्था मुहैया कराई गई है, पर उसे मैं ‘आराम महल’ की दृष्टि से कतई नहीं देखता, वह मेरा स्वभाव नहीं। फूल, पौधे, गोशाला से समृद्ध 47 एकड़ का यह सुंदर हेरीटेज राजभवन मुझे काम करते रहने की ऊर्जा देता है। मैं चाहता हूँ कि इसका नाम इसकी प्रतिष्ठा के कारण द तक पहुँचे। राजभवन के स्नानघर भी मेरे घर के कमरों से बड़े हैं। कुल मिलाकर सबकुछ शाही ढंग का! पर ऐसी विलासिता मुझे रास नहीं आती। मेरा दिल आम लोगों की तरफ दौड़ता रहता है, उनके बीच ही वह रमता है। (पृष्ठ 266).
502 ## - DISSERTATION NOTE
Dissertation note चरैवेति चरैवेति यही तो मन्त्र है अपना , नहीं रुकना नहीं थकना<br/>सतत् चलना सतत् चलना , यही तो मंत्र है अपना।<br/>शुभंकर मंत्र है अपना।।२<br/>हमारी प्रेरणा भास्कर है , जिनका रथ सतत् चलता ,<br/>युगों से कार्यरत है , जो सनातन है प्रबल ऊर्जा ,<br/>गति मेरा धरम है जो भ्रमण करना भ्रमण करना ,<br/>यही तो मंत्र है अपना शुभंकर मंत्र है अपना। ।<br/>हमारी प्रेरणा माधव है जिनके मार्ग पर चलना ,<br/>सभी हिंदू सहोदर है ये जन – जन को सभी कहना ,<br/>स्मरण उनका करेंगे और समय दें अधिक जीवन का ,<br/>यही तो मंत्र है अपना शुभंकर मंत्र है अपना। ।<br/>हमारी प्रेरणा भारत है भूमि की करें पूजा ,<br/>सुजलां सुफलां सदा स्नेहा यही तो रूप है उसका ,<br/>जियें माता के कारण हम करें , जीवन सफल अपना ,<br/>यही तो मंत्र है अपना शुभंकर मंत्र है अपना। ।<br/>सतत् चलना सतत् चलना , यही तो मंत्र है अपना।<br/>शुभंकर मंत्र है अपना।
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Source of classification or shelving scheme Dewey Decimal Classification
Koha item type Reference
Holdings
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    Dewey Decimal Classification     हिन्दी भाषा संग्रह Raj Kumar Goel Institute of Technology Raj Kumar Goel Institute of Technology 16/08/2018 821.2 83767 16/08/2018 16/08/2018 Reference
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