वैशाली की नगरवधू (बौद्धकालीन ऐतिहासिक उपन्यास) (Record no. 2262)
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| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 04447nam a2200109Ia 4500 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 891.433 |
| 100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | चतुरसेन, आचार्य (Chtursen, Aacharya) |
| 245 #0 - TITLE STATEMENT | |
| Title | वैशाली की नगरवधू (बौद्धकालीन ऐतिहासिक उपन्यास) |
| Remainder of title | (Vaishali Ki Nagar Vadhu) |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Name of publisher, distributor, etc | राजपाल |
| Place of publication, distribution, etc | दिल्ली |
| Date of publication, distribution, etc | २००० |
| 500 ## - GENERAL NOTE | |
| General note | हिन्दी भाषा के महान उपन्यासकार आचार्य चतुरसेन शास्त्री की रचना ‘वैशाली की नगरवधू’ वह उपन्यास है जिसकी गिनती हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में की जाती है। अपने इस उपन्यास के बारे में स्वयं आचार्य जी ने कहा था, "मैं अब तक की सारी रचनाओं को रद्द करता हूँ और ‘वैशाली की नगरवधू’ को अपनी एकमात्र रचना घोषित करता हूँ।"<br/>यह उपन्यास भारतीय जीवन का जीता-जागता खाका है। उपन्यास की कहानी का परिवेश ऐतिहासिक और सांस्कृतिक है जो बौद्ध काल से जुड़ी हुई है। इसमें तत्कालीन लिच्छिवि संघ की राजधानी वैशाली की पुरावधू ‘आम्रपाली’ को प्रधान चरित्र के जरिए उस युग के हास-विलासपूर्ण सांस्कृतिक वातावरण को उकेरने की कोशिश की गयी है। वस्तुतः यह उपन्यास मगध और वैशाली के रूप में साम्राज्य और गणतंत्र के टकराव को रूप देता है। इसमें शास्त्री जी वैशाली के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि राजतन्त्र और तानाशाह की जीत, दुश्मन को पूरी तरह बरबाद कर देती है जबकि जनप्रतिनिधियों और लोकतन्त्र की जीत उतनी हिंसक नहीं होती।<br/>About the author : आचार्य चतुरसेन जी साहित्य की किसी एक विशिष्ट विधा तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने किशोरावस्था में कहानी और गीतिकाव्य लिखना शुरू किया, बाद में उनका साहित्य-क्षितिज फैला और वे जीवनी, संस्मरण, इतिहास, उपन्यास, नाटक तथा धार्मिक विषयों पर लिखने लगे।<br/>शास्त्रीजी साहित्यकार ही नहीं बल्कि एक कुशल चिकित्सक भी थे। वैद्य होने पर भी उनकी साहित्य-सर्जन में गहरी रुचि थी। उन्होंने राजनीति, धर्मशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास और युगबोध जैसे विभिन्न विषयों पर लिखा। ‘वैशाली की नगरवधू’, ‘वयं रक्षाम’ और ‘सोमनाथ’, ‘गोली’, ‘सोना औरखून ’ (तीन खंड), ‘रत्तफ़ की प्यास’, ‘हृदय की प्यास’, ‘अमर अभिलाषा’, ‘नरमेघ’, ‘अपराजिता’, ‘धर्मपुत्र’ सबसे ज्यादा चर्चित कृतियाँ हैं। |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Source of classification or shelving scheme | Dewey Decimal Classification |
| Koha item type | Reference |
| Withdrawn status | Lost status | Source of classification or shelving scheme | Damaged status | Not for loan | Collection code | Home library | Current library | Date acquired | Full call number | Barcode | Date last seen | Bill Date | Koha item type |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Dewey Decimal Classification | हिन्दी भाषा संग्रह | Raj Kumar Goel Institute of Technology | Raj Kumar Goel Institute of Technology | 16/08/2018 | 891.433 | 14076 | 16/08/2018 | 16/08/2018 | Reference | ||||
| Dewey Decimal Classification | हिन्दी भाषा संग्रह | Raj Kumar Goel Institute of Technology | Raj Kumar Goel Institute of Technology | 16/08/2018 | 891.433 | 14077 | 16/08/2018 | 16/08/2018 | Reference |
